खेतों के आलिंगन
मेड़ों का चुम्बन,
ऊसर के लांक्षन
सहती है नहर,
खेतों के बीच से
बहती है नहर ..
खेतों को देती है
अपना वो तन मन,
फसलों पर न्योछवार
करती है यौवन,
बंजर धारा को
दे देती है जीवन,
क्यूँ एक अबला सी
रहती है नहर,
खेतों के बीच से
बहती है नहर..
सूखे और बाढ़ का
लेकर कलंक,
बहती चुपचाप वो
मधुर जलतरंग,
सरिता से पीड़ा
कहती है नहर,
खेतों के बीच से
बहती है नहर..
चाँद सा चमकता चेहराआज क्यों है मौन सा ?माँग से है जो मिटारंग था वो कौन सा ?वो प्रीत था या प्राण थावो वज्र था या बाण था ?उसका भी रंग लाल थावो अबीर या गुलाल था ?आज तू मुझे बताये चीर क्यों सफ़ेद है ?क्या छुपा रही है मुझसेकौन सा वो भेद है ?मेंहदी का रंग क्यों छुटाये नौलखा है क्यों टुटा ,क्यों पैंजनी बेजान हैक्यों घर बना शमशान है ?थी खनकती चूड़ीयाँ वो आज क्यों खामोश है ,सँवरती जिसमे देख करवो आईना बेहोश है Iवीरों की पिचकारीयाँचला रही थी गोलियाँ ,छींटा पड़ा जो लाल थावो अबीर या गुलाल था ?स्वप्न को सँजोने वालीआँख तेरी क्यों है नम ,आग बनी सिसकीयाँअश्रु बन गये हैं बम Iवो शहीद हो गयावक्ष से था जो बहा ,उसका भी रंग लाल थावो अबीर या गुलाल था ?खो दिया है तुने जिसकोदेश का वो गर्व है ,ये होली है शहीद कीशहीद का ये पर्व है Iतिरंगा ऊँचा है खड़ाधरा पर लतफत पड़ा ,देश का वो लाल थाक्या अबीर क्या गुलाल था ?